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स्वास्थ्य विभाग ने RIMS Director को चेताया, कहा -अनावश्यक फाइलें भेजकर समाचार पत्रों में तथ्यहीन खबरें छपवाने से बचें_我的网站

A | जागरण संवाददाता, गुमला। गुमला प्रखंड अंतर्गत करौंदी पंचायत के तिर्रा गांव में के बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने के बहाने घर पर बुलाकर बाइबल की शिक्षा दी जा रही थी। गांव की तीन महिलाएं ललिता देवी, नीलम कुमारी और मयंती देवी चंगाई सभा से जुड़ी हुई हैं। इन्हीं तीनों के द्वारा हिन्दू परिवारों के बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने के बहाने बुलाया जाता था और उन्हें ईसाई धर्म की पुस्तकें पढ़ाई जाती थीं।,ट्यूशन पढ़ने वाले बच्चे चार से 13 साल के बीच के हैं। ट्यूशन पढ़ने वाले बच्चों की संख्या 27 है। बच्चों से ईसाई धर्म से जुड़ी परीक्षाएं भी ली जाती थी, जिसका मूल्यांकन संतोष सोरेन नामक व्यक्ति द्वारा किया जाता था। मूल्यांकन के उपरांत प्रशस्ति पत्र भी दी जाती थी।,परीक्षा में बेहतर अंक पाने वालों को एक बाक्स में कीमती सामग्री और बाइबल भेंट की जाती थी। बच्चों को गीता और रामायण न पढ़ने की नसीहत भी दी जाती थी। गिफ्ट पैक में फुटबॉल, लंच बॉक्स, टोपी, स्टील का वाटर बोटल आदि भरा रहता था।,बच्चों से कहा जाता था जितना अधिक बाईबल पढ़ोगे उतना अधिक गिफ्ट पाओगे। ग्रामीणों का आरोप है कि यह सब बच्चों को प्रलोभन देकर मतांतरण कराने की साजिश थी। घटना प्रकाश में आने के बाद बजरंग दल के जिला संयोजक संतोष यादव ने कहा कि गरीब और भोले-भाले हिन्दू परिवारों को टारगेट कर मतांतरण कराने की साजिश रची जा रही है। जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।,उन्होंने कहा कि बलपूर्वक या प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन कराना गैरकानूनी और दंडनीय अपराध है। इस कानून के तहत दोषियों को तीन साल की कैद और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा हो सकती है। वहीं यदि मामला नाबालिग, महिला, अनुसूचित जाति या जनजाति से संबंधित है तो सजा बढ़कर चार साल कैद और एक लाख रुपये जुर्माना तक हो सकता है। घटना के बाद बजरंग दल कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने बैठक कर तीनों महिलाओं को चेतावनी दी। वहीं, जप्त सामग्री को गांव के अखाड़े में जला दिया गया। मौके पर बजरंग दल प्रखंड संयोजक शानू साहू, प्रखंड अध्यक्ष प्रमोद सिंह, प्रखंड सह मंत्री सुरेंद्र साहू, पंचायत संयोजक सूरज साहू सहित तिर्रा गांव के सैकड़ों ग्रामीण मौजूद रहे।。 राज्य ब्यूरो, रांची। स्वास्थ्य विभाग में फाइलें लंबित होने के कारण कई निर्णय नहीं लिए जाने या मशीन-उपकरण खरीदे नहीं जाने के रिम्स निदेशक डा. राजकुमार के आरोपों पर स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने कड़ी टिप्पणी की है।,इसे लेकर उन्हाेंने निदेशक को कड़ा पत्र लिखा है। उन्होंने कहा है कि रिम्स द्वारा अनावश्यक रूप से मूल फाइलें विभाग को भेजी जा रही हैं। उसमें फाइल विभाग को भेजने का कोई कारण नहीं बताया जाता है। दूसरी तरफ, समाचार पत्रों में इसे लेकर तथ्यहीन सूचना प्रकाशित कराने के मामले सामने आए हैं। निदेशक इससे बचें। रिम्स निदेशक को भेजे गए पत्र में अपर मुख्य सचिव ने कहा है कि रिम्स एक स्वायत्तशासी संस्थान है और इसका शासी परिषद कोई भी प्रशासनिक और वित्तीय निर्णय लेने में सक्षम है।,इसके पास पूरी शक्तियां हैं। इसके बाद भी कई मामलों में देखा गया है कि अनावश्यक रूप से फाइलें विभाग के पास निर्णय के लिए भेज दी जाती हैं। उन्होंने निदेशक को स्पष्ट निर्देश दिया है कि रिम्स से संबंधित सभी मामलों में शासी परिषद तथा विभिन्न समितियों के निर्णय के आलोक में कार्रवाई करें। यदि किसी मामले में शासी परिषद के अध्यक्ष या उपाध्यक्ष की सहमति की आवश्यकता हो तो स्पष्ट प्रस्ताव के साथ संबंधित फाइल सीधे अध्यक्ष या उपाध्यक्ष को भेजी जाए। अपर मुख्य सचिव ने रिम्स निदेशक से यह भी कहा है कि शासी परिषद या किसी समिति का निर्णय होता है कि किसी मामले में विभाग से अनुमति या अनुमोदन की आवश्यकता है तो परिषद या समिति के निर्णय से संबंधित स्पष्ट प्रस्ताव पत्र के साथ विभाग को भेजें न के फाइल के माध्यम से। किसी भी हाल में कोई फाइल विभाग को नहीं भेजें।。
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Published on:14:29:56